Mirzapur: जिले में अधिवक्ताओं और प्रशासन के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एसडीएम सदर न्यायालय में शनिवार को अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए हंगामा और तोड़फोड़ की। पूरा विवाद अधिवक्ता और सपा नेता सतीश मिश्रा के साथ कथित दुर्व्यवहार से जुड़ा बताया जा रहा है।
घटना से जुड़ा वीडियो और पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद मामला और गरमा गया। इसके बाद अधिवक्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन (Mirzapur) को मिले पत्र के आधार पर शनिवार को एक आपात बैठक बुलाई गई।
बैठक में अधिवक्ताओं ने सीओ सिटी विवेक जावला और एसडीएम सदर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। साथ ही दोनों अधिकारियों के तत्काल निलंबन की मांग करते हुए आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया।
Mirzapur: क्या है पूरा विवाद?
बताया जा रहा है कि शुक्रवार रात टोल प्लाजा हटाने की मांग को लेकर चल रहे धरने को समाप्त कराने प्रशासनिक अधिकारी (Mirzapur) पहुंचे थे। इसी दौरान वहां मौजूद सपा नेता सतीश मिश्रा के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया।
आरोप है कि अधिकारियों ने उनके साथ अपमानजनक टिप्पणी की और जबरन गाड़ी में बैठाया, जिससे अधिवक्ताओं में नाराजगी फैल गई। सतीश मिश्रा ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं और इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
बैठक के बाद कोर्ट में तोड़फोड़
आपात बैठक के बाद बड़ी संख्या में अधिवक्ता कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे और नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति उस समय बिगड़ गई जब आक्रोशित अधिवक्ता एसडीएम कोर्ट (Mirzapur) में घुस गए। इस दौरान कुर्सियां फेंकी गईं, फाइलें बिखेरी गईं और लैपटॉप को नुकसान पहुंचाया गया। पूरा परिसर “मुर्दाबाद” के नारों से गूंज उठा। घटना का वीडियो भी सामने आया है।
घटना के बाद नाराज अधिवक्ता पुलिस अधीक्षक कार्यालय (Mirzapur) भी पहुंचे, जहां उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने साफ कहा कि जब तक दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

