AQI 156 ने बढ़ाई लोगों की चिंता, वाराणसी शहर में हवा की गुणवत्ता हो रही खराब, जानिए सबसे ज्यादा कौन सा क्षेत्र प्रभावित

वाराणसी शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार खराब बना हुआ है और इसमें सुधार के कोई ठोस संकेत नहीं दिख रहे हैं। साल 2026की शुरुआत से अब तक एक्यूआई का स्तर 100के नीचे नहीं आया है, जो चिंता का विषय बनता जा रहा है। शनिवार को वाराणसी का औसत एक्यूआई 156दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिहाज से मध्यम से खराब श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्तर एक दिन में लगभग 5सिगरेट पीने जितना नुकसानदेह प्रभाव शरीर पर डाल सकता है।

भेलूपुर की हवा सबसे अधिक खराब

शहर के विभिन्न क्षेत्रों में लगे चार मॉनिटरिंग केंद्रों के आंकड़ों के अनुसार, भेलूपुर क्षेत्र की हवा सबसे अधिक प्रदूषित पाई गई। यहां धूल, वाहनों का धुआं और निर्माण कार्यों के कारण प्रदूषण (AQI) का स्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है।

एक सप्ताह में बढ़ता रहा प्रदूषण

बीते एक सप्ताह के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदूषण का स्तर लगातार उतार-चढ़ाव के साथ ऊंचा ही बना रहा—

  1. 22 मार्च: 131 (सप्ताह का सबसे कम)
  2. 27 मार्च (बृहस्पतिवार): 186 (सप्ताह का सबसे अधिक)
  3. वर्तमान स्तर: 156

यह स्थिति बताती है कि शहर में प्रदूषण नियंत्रण के उपाय अभी पर्याप्त प्रभावी नहीं हो पाए हैं।

वाहनों और धूल को माना जा रहा मुख्य कारण

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि शहर में बढ़ते वाहनों की संख्या, सड़कों पर उड़ती धूल, निर्माण कार्य और कूड़ा जलाने जैसी गतिविधियां प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। दिनभर भारी ट्रैफिक और सड़कों की नियमित सफाई की कमी भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है।

डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक 150से अधिक एक्यूआई (AQI) रहने पर—सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ता है, बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर पड़ता है आंखों में जलन और गले में खराश की समस्या हो सकती है।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी कदम

विशेषज्ञों ने स्थिति सुधारने के लिए कुछ उपाय सुझाए हैं—

  1. सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव
  2. निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय
  3. सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा
  4. कूड़ा जलाने पर सख्त रोक
  5. हरित क्षेत्र (पेड़-पौधे) बढ़ाना

कुल मिलाकर, वाराणसी में लगातार खराब होती हवा की गुणवत्ता (AQI) प्रशासन और नागरिकों दोनों के लिए चेतावनी संकेत है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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