Varanasi में राम नवमी के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध ‘राम कथा मंदाकिनी’ शोभायात्रा भव्य रूप से निकाली गई। गंगा तट पर सजी इस शोभायात्रा ने श्रद्धा, भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े।
शोभायात्रा में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन पर आधारित आकर्षक झांकियां निकाली गईं। इन झांकियों (Varanasi) में राम दरबार, वन गमन, धनुष यज्ञ, केवट संवाद, लव-कुश प्रसंग, हनुमान-कालनेमि संवाद और शिव स्तुति जैसे प्रसंगों का सजीव चित्रण किया गया। गंगा के किनारे इन झांकियों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा वातावरण श्रीराममय हो गया हो और स्वयं भगवान श्रीराम भक्तों को आशीर्वाद देने उपस्थित हों।
39 वर्षों की परंपरा का भव्य निर्वहन
यह शोभायात्रा पिछले 39 वर्षों से लगातार निकाली जा रही है। इस वर्ष भी परंपरा (Varanasi) का निर्वहन करते हुए शोभायात्रा की शुरुआत तुलसी घाट से की गई, जहां डॉ. विशम्बर नाथ मिश्रा ने विधिवत आरती कर इसे रवाना किया। पूरे मार्ग में “जय श्रीराम” के जयघोष गूंजते रहे और श्रद्धालु भक्ति में सराबोर नजर आए।
केवट बंधुओं का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान 30 केवट बंधुओं को साफा बांधकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान भगवान राम और केवट के सेवा-भाव से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग की स्मृति में किया गया, जो समर्पण और समानता का प्रतीक है।
प्रयागराज के पत्थरचट्टी रामलीला (Varanasi) दल द्वारा प्रस्तुत झांकियों का महिसासुर घाट स्थित मुक्ताकाश मंच पर भव्य मंचन किया गया। बच्चों और कलाकारों ने देवी-देवताओं की वेशभूषा में शानदार प्रस्तुति दी, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने झांकियों की आरती उतारकर और शंखनाद कर आयोजन को और भी दिव्य बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में राजघाट और महिषासुर घाट पर तीन उत्कृष्ट झांकियों (Varanasi) को पुरस्कृत किया गया। साथ ही शोभायात्रा में भाग लेने वाले कलाकारों और मंडलों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

