कोरोना काल में भी नहीं रूकी थी सेवा, 35 साल में पहली बार अन्नपूर्णा मंदिर की रसोई हुई बंद- महंतजी ने क्या कहा?

Varanasi News: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक हालात का असर अब देश के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। रसोई गैस (एलपीजी) की कथित कमी का प्रभाव अब काशी की धार्मिक परंपराओं पर भी पड़ता नजर आ रहा है। गैस सिलेंडरों की कमी के कारण वाराणसी के प्रसिद्ध मां अन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र ट्रस्ट की रसोई व्यवस्था प्रभावित हो गई है। अन्नपूर्णा मंदिर के महंत श्री शंकरपुरीजी ने कहा कि पिछले 35 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है जब अन्नपूर्णा मंदिर की रसोई बंद करनी पड़ी है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। ट्रस्ट की एक शाखा में प्रसाद बनना पूरी तरह बंद हो गया है, जबकि दूसरी शाखा में गैस की बचत के लिए भोजन के मेन्यू में कटौती की जा रही है।

महंत शंकरपुरी ने क्या कहा

अन्नपूर्णा मंदिर के महंत श्री शंकरपुरी ने बताया कि- हमारे सामने गैस का संकट आ पड़ी है, वर्तमान में 1-2 एजेंसी गैस सिलेंडर दे रहे थे पर दो-तीन दिन से वो भी बंद हो गई। शनिवार सुबह तक लगभग 3 हजार भक्तों को भोजन सेवा दी गई। अब गैस सिलेंडर न होने की वजह से यूनिट बंद होने की कगार पर है। उन्होंने कहा- तमाम अधिकारियों के फोन भी आए कि गैस सिलेंडर मिल जाएगा, पर अभी तक किसी तरह की व्यवस्था नहीं हो सकी है। इसके चलते हमारी यूनिट 2 बंद हो चुकी है, ऐसा ही चलता रहा तो शाम तक पहली यूनिट भी बंद हो जाएगी।

काशी की अन्नदान परंपरा पर संकट

वाराणसी को मां अन्नपूर्णा की नगरी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहता और मां अन्नपूर्णा सभी का पेट भरती हैं। लेकिन मौजूदा हालात में गैस सिलेंडरों की कमी के कारण इस परंपरा पर अस्थायी संकट खड़ा हो गया है। अन्नक्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि उपलब्ध गैस सिलेंडर खत्म हो चुके हैं और नए सिलेंडर समय पर नहीं मिल पा रहे हैं, जिसके कारण प्रसाद बनाना संभव नहीं हो पा रहा है।

अन्नक्षेत्र की एक शाखा की रसोई पूरी तरह बंद

ट्रस्ट के अनुसार अन्नक्षेत्र की दूसरी शाखा में रसोई पूरी तरह बंद करनी पड़ी है। गैस की अनुपलब्धता के कारण वहां प्रसाद तैयार नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर पहली शाखा में अभी प्रसाद वितरण जारी है, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण वहां भी मेन्यू में कटौती करनी पड़ रही है। मां अन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना लगभग 25 वर्ष पहले महंत रामेश्वर पुरी ने की थी। उन्होंने संकल्प लिया था कि यहां प्रसाद वितरण की सेवा कभी बंद नहीं होगी।

कोरोना काल में भी नहीं रुकी थी सेवा

अन्नक्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार कोरोना महामारी के कठिन दौर में भी यहां की रसोई बंद नहीं हुई थी। उस समय भी प्रतिदिन हजारों जरूरतमंदों और श्रद्धालुओं को भोजन कराया जाता रहा। लेकिन मौजूदा गैस संकट के कारण पहली बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है।

रोजाना हजारों श्रद्धालु करते हैं प्रसाद ग्रहण

सामान्य दिनों में अन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र में प्रतिदिन करीब 8 से 10 हजार श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। देश के अलग-अलग राज्यों से काशी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह प्रसाद ग्रहण करना एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुभव माना जाता है। लेकिन वर्तमान हालात में कई श्रद्धालुओं को बिना प्रसाद लिए ही वापस लौटना पड़ रहा है।

श्रद्धालुओं में निराशा

दूर-दराज से काशी पहुंचे कई श्रद्धालुओं ने इस स्थिति पर निराशा जताई। उनका कहना है कि वे मां अन्नपूर्णा का प्रसाद ग्रहण करने की विशेष इच्छा लेकर आए थे, लेकिन यहां पहुंचने पर प्रसाद न मिलने से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है।

एक श्रद्धालु ने बताया कि वे पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ काशी आए थे, लेकिन गैस की कमी के कारण प्रसाद न मिलना दुखद है। हालांकि कुछ श्रद्धालु इसे मां अन्नपूर्णा की परंपरा पर आया अस्थायी संकट मानते हुए उम्मीद जता रहे हैं कि जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी।

अजय राय ने सरकार को घेरा

इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस नेता अजय राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा- धर्म की नगरी काशी में आज जो हुआ वह हृदयविदारक है। गैस की किल्लत और बेतुके सरकारी नियमों के कारण मां अन्नपूर्णा मंदिर में आज प्रसाद नहीं बन सका। लाखों भक्त खाली हाथ लौटे। भाजपा सरकार ने अपनी कुनीतियों से काशी की अन्नदान की महान परंपरा पर ग्रहण लगा दिया है। बाबा विश्वनाथ देख रहे हैं।

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