योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने नोएडा से जुड़े पुराने अंधविश्वास का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद इसे पूरी तरह तोड़ दिया। लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि पहले यह धारणा थी कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है, उसकी कुर्सी चली जाती है।
मुख्यमंत्री (CM Yogi) ने कहा कि उन्हें भी नोएडा न जाने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने इसे नकारते हुए कहा कि “जब एक दिन पद छोड़ना ही है, तो इस तरह के अंधविश्वास में क्यों पड़ें।” उन्होंने कहा कि वह नोएडा गए और वहां की जमीनी हकीकत को समझा।
CM Yogi: परियोजनाएं अधूरी पड़ी और इमारतें खंडहर में
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि जब वह नोएडा पहुंचे तो उन्हें पता चला कि करीब 4 लाख घर खरीदार वर्षों से अपने मकानों के लिए परेशान थे। लोगों ने अपनी जीवनभर की कमाई बिल्डरों को दे दी थी, लेकिन उन्हें घर नहीं मिला था। कई परियोजनाएं अधूरी पड़ी थीं और इमारतें खंडहर में बदल रही थीं।
उन्होंने कहा कि इस समस्या को सुलझाने के लिए उन्होंने नोएडा अथॉरिटी और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों के साथ बैठक की। उस समय दोनों प्राधिकरण भारी कर्ज में थे, लेकिन सरकार ने नीतिगत सुधार किए, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की और बिल्डरों को जिम्मेदारी निभाने के लिए बाध्य किया।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इन प्रयासों के परिणामस्वरूप अब तक लगभग 4 लाख लोगों को उनके मकान मिल चुके हैं। उन्होंने (CM Yogi) यह भी दावा किया कि जो अथॉरिटी पहले कर्ज में डूबी थीं, वे अब हजारों करोड़ रुपये के सरप्लस में आ गई हैं और क्षेत्र में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर व निवेश का माहौल बना है।
इस दौरान उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारें विकास में बाधा डालती थीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग पहले अंधविश्वास के कारण नोएडा नहीं जाते थे, वही अब विकास की बातें कर रहे हैं।

