कांग्रेस ने वाराणसी के शास्त्रीघाट पर ‘संविधान संवाद सम्मेलन’ आयोजित किया। इसमें किशोरी लाल शर्मा, पवन खेड़ा जैसे कई सांसद और राष्ट्रीय नेता शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता, नागरिक अधिकारों, धर्मनिरपेक्षता और संघीय ढांचे की रक्षा करना था। काशी की अस्मिता और संविधान को खतरे में डालने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। कांग्रेस ने जनता से लोकतंत्र बचाने के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया।

HighLights
- कांग्रेस ने वाराणसी में संविधान संवाद सम्मेलन आयोजित किया।
- लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों, काशी की अस्मिता पर चर्चा।
- संविधान व लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का आह्वान।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर संकट, नागरिक अधिकारों की रक्षा, धर्मनिरपेक्षता पर हमले, संघीय ढांचे पर आक्रमण और काशी की अस्मिता के साथ लोकतंत्र एवं संविधान को खतरे में डालने के खिलाफ रविवार को कांग्रेस ने संविधान संवाद सम्मेलन का आयोजन किया।
यह आयोजन शास्त्रीघाट पर आयोजित हुआ जिसमें प्रदेश भर के कांग्रेस सांसद जैसे किशोरी लाल शर्मा, तनुज पुनिया, राकेश राठौर, इमरान मसूद, कुंवर उज्जवल रमण सिंह सहित कई राष्ट्रीय नेता भाग ले रहे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत और अन्य वरिष्ठ नेताओं की भी उपस्थिति रही। इस सम्मेलन के लिए वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, मीरजापुर के सैकड़ों कार्यकर्ता जुटे हैं।
इस दौरान मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास के नाम पर रानी अहिल्याबाई की मूर्ति तोड़ने, प्रयागराज में संत अविमुक्तेश्वरानंद के साथ दुर्व्यवहार, और काशी की आस्था एवं अस्मिता के साथ खिलवाड़ के मुद्दे उठाए गए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में यह रैली केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि काशीवासियों की अपनी आवाज को सरकार तक पहुंचाने का एक माध्यम है।
सभा की शुरुआत करते हुए उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को यहां से भगाना है, तो धूप में बैठकर संघर्ष करना होगा। यह सम्मेलन न केवल काशी की अस्मिता की रक्षा के लिए है, बल्कि यह लोकतंत्र की रक्षा का भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यों से लोकतांत्रिक मूल्यों को खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस सम्मेलन में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी, जिसमें धार्मिक असहिष्णुता, सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के लिए आवश्यक कदम शामिल हैं।
कांग्रेस का यह प्रयास है कि वे जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझें और उन्हें समाधान प्रदान करें। इस सम्मेलन के माध्यम से पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वे काशीवासियों के साथ हैं और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि काशी की सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखना आवश्यक है। इस संदर्भ में, उन्होंने काशी की ऐतिहासिकता और उसकी धार्मिक महत्ता को भी रेखांकित किया।

