Varanasi: संकट मोचन संगीत समारोह, दूसरे दिन सुर, लय और भक्ति का दिव्य संगम, कलाकारों ने बांधा समां

Varanasi: संकट मोचन संगीत समारोह के दूसरे दिन संकट मोचन हनुमान मंदिर परिसर सुर, लय और साधना की अद्भुत आभा से आलोकित हो उठा। पूरी रात चली संगीत साधना में देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने भगवान हनुमान के चरणों में अपनी कला समर्पित की। वातावरण भक्ति और शास्त्रीय संगीत की मधुरता से सराबोर रहा और श्रोतागण देर रात तक मंत्रमुग्ध होकर कार्यक्रम का आनंद लेते रहे।

इस वर्ष 103वें आयोजन में छह दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में 150 से अधिक कलाकार भाग ले रहे हैं, जहां प्रतिदिन लगभग 12 घंटे तक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। दूसरे दिन की निशा में शास्त्रीय संगीत और वादन की विविध रंगतें देखने को मिलीं।

प्रस्तुति श्रृंखला ने मोहा मन

कार्यक्रम (Varanasi) का शुभारंभ प्रसिद्ध मेंडोलिन वादक पंडित यू. राजेश ने किया। उनके राग आधारित मेंडोलिन वादन ने वातावरण को शांत और आध्यात्मिक बना दिया। इसके बाद विश्व विख्यात तालवादक पंडित शिवमणि ने अपनी ऊर्जावान ड्रम प्रस्तुति से श्रोताओं को रोमांचित कर दिया। पारंपरिक और आधुनिक तालों का अनूठा संगम उनकी प्रस्तुति की विशेषता रहा।

प्रख्यात संगीतज्ञ पंडित विश्व मोहन भट्ट ने मोहन वीणा वादन से कार्यक्रम में गहराई और आध्यात्मिकता का संचार किया। उनकी प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर एकाग्रता और शांति में डूबा नजर आया। इसके पश्चात सलिल भट्ट ने सात्विक वीणा वादन प्रस्तुत कर श्रोताओं को नए प्रयोगों से परिचित कराया। वहीं तबला वादक जरगाम अकरम खां ने जटिल तालों और तेज लयकारी से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति (Varanasi) देते हुए उस्ताद गुलाम अब्बास खां ने अपनी मधुर आवाज से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इसके बाद पंडित शुभ महाराज ने एकल तबला वादन से ताल और लय की बारीकियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सितार वादन में पंडित कुशल दास ने राग की शुद्धता और तकनीकी दक्षता से दर्शकों का दिल जीत लिया।

दूसरे दिन की अंतिम प्रस्तुति पंडित रतन मोहन शर्मा ने दी। उनके शास्त्रीय गायन ने कार्यक्रम (Varanasi) का भावपूर्ण समापन किया, जिसमें भक्ति, भाव और परंपरा का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

Varanasi: पूरी रात गूंजती रही संगीत साधना

  1. कार्यक्रम (Varanasi) भोर तक लगातार चलता रहा
  2. देश-विदेश से आए संगीत प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी
  3. कलाकारों ने अपनी कला को हनुमत दरबार में समर्पित कर आध्यात्मिक वातावरण का सृजन किया

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