Varanasi: 24 साल पुराना टकसाल शूटआउट केस फिर सुर्खियों में, धनंजय सिंह हुए पेश, अदालत में तेज हुई सुनवाई

Varanasi: शहर के बहुचर्चित टकसाल सिनेमा शूटआउट कांड में एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। करीब 24 वर्ष पुराने इस मामले में सुनवाई तेज होने के साथ ही अदालत में नए सवाल उठने लगे हैं। पूर्व सांसद धनंजय सिंह की पेशी और उनके द्वारा दायर प्रार्थना पत्र ने केस को नया मोड़ दे दिया है।

मंगलवार को एमपी-एमएलए कोर्ट में विशेष न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत (Varanasi) में धनंजय सिंह स्वयं उपस्थित हुए। इस दौरान उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 311 के तहत आवेदन देकर गवाहों से पुनः जिरह की मांग की। उनका कहना था कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए गवाहों से दोबारा सवाल करना आवश्यक है। अदालत ने इस मांग को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी।

इस केस (Varanasi) में आरोपी विधायक अभय सिंह की ओर से भी अदालत में पक्ष रखा गया। इससे पहले प्ली ऑफ एलीबाई (घटना के समय अन्य स्थान पर मौजूद होने का दावा) से जुड़े गवाहों की पेशी हो चुकी है। डॉ. अरविंद कुमार सिंह और फार्मासिस्ट सुभाकर यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बयान दर्ज कराए थे। उन्होंने दावा किया कि घटना के समय अभय सिंह फैजाबाद के एक सरकारी अस्पताल में इलाज करा रहे थे।

Varanasi: जानिए पूरा मामला

यह मामला 4 अक्टूबर 2002 की उस घटना से जुड़ा है, जब नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा के पास धनंजय सिंह के काफिले पर अचानक फायरिंग की गई थी। उस समय वे निर्दलीय विधायक थे और जौनपुर जा रहे थे। हमले में वे, उनके गनर और चालक सहित कई लोग घायल हो गए थे। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी और हमलावर फरार हो गए थे।

धनंजय सिंह ने अपनी तहरीर में आरोप लगाया था कि अभय सिंह से उनकी रंजिश छात्र राजनीति के समय से चली आ रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन पर पहले भी कई बार जानलेवा हमले किए जा चुके हैं।

लंबे समय से लंबित इस मामले में अब अदालत (Varanasi) ने सख्त रुख अपनाया है। स्पष्ट कर दिया गया है कि गवाहों की जिरह में अब कोई देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। हालांकि अदालत ने कुछ दस्तावेजों को तलब करने की मांग खारिज की है, लेकिन पुनः जिरह की अनुमति देकर मामले को निर्णायक दिशा देने का संकेत दिया है।

गौरतलब है कि यह केस वर्षों तक इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के चलते लंबित रहा। वर्ष 2012 में हाईकोर्ट ने संबंधित सत्र परीक्षण के निस्तारण तक इस मामले में फैसला रोक दिया था। अगस्त 2025 में उस मामले का निपटारा होने के बाद अब इस केस (Varanasi) में सुनवाई दोबारा शुरू हो सकी है।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles