Varanasi को नशामुक्त बनाने की मांग तेज: हजारों लोगों ने पदयात्रा में लिया संकल्प

Varanasi में शनिवार को नशामुक्ति के समर्थन में जनसैलाब उमड़ पड़ा। भगवती मानव कल्याण संगठन के तत्वावधान में “नशामुक्त भारत, खुशहाल काशी” के लक्ष्य के साथ एक विशाल पदयात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में महिलाएं, युवा और शहरवासी शामिल हुए।

यह पदयात्रा काशी हिंदू विश्वविद्यालय मैदान (Varanasi) से शुरू हुई और शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए आगे बढ़ी। पूरे रास्ते कार्यकर्ताओं ने नशामुक्ति के समर्थन में नारे लगाए और समाज को नशे से दूर रहने का संदेश दिया।

आयोजन (Varanasi) का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और समाज में नैतिक व आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करना बताया गया। कार्यक्रम का संचालन संगठन के संस्थापक योगीराज शक्तिपुत्र जी महाराज के निर्देशन में किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष पूजा शुक्ला ने कहा कि काशी संतों और आस्था की भूमि है, ऐसे में यहां नशे का बढ़ता प्रभाव चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि शराब की बढ़ती उपलब्धता के कारण युवा वर्ग (Varanasi) तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है, जिससे परिवार और समाज दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

Varanasi: महिलाओं की भूमिका पर विशेष जोर

वक्ताओं ने महिलाओं से आगे आकर नशामुक्ति अभियान (Varanasi) को मजबूत करने की अपील की। उनका कहना था कि नशे के कारण घरेलू हिंसा और सामाजिक अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाएं और परिवार होते हैं।

केंद्रीय महासचिव अजय अवस्थी ने कहा कि भगवान शिव को नशे से जोड़ना धार्मिक आस्था की गलत व्याख्या है। उन्होंने समाज के बुद्धिजीवियों से अपील की कि वे इस विषय पर खुलकर आवाज उठाएं और युवाओं को सही दिशा दें।

सरकार की नीतियों पर उठे सवाल

कार्यक्रम में शामिल पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि राजस्व बढ़ाने के लिए शराब के ठेके बढ़ाए जा रहे हैं, जिससे समाज में नशे को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में रही, तो देश का भविष्य प्रभावित होगा।

पदयात्रा के दौरान संगठन ने प्रदेश सरकार के सामने कई मांगें रखीं—

  1. काशी को नशामुक्त घोषित किया जाए
  2. गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए
  3. गौ माता को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया जाए

यात्रा के दौरान शहर के विभिन्न स्थानों पर संत-महात्माओं, समाजसेवी संस्थाओं और स्थानीय नागरिकों ने पदयात्रा का स्वागत किया। प्रशासन के सहयोग से पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

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