Varanasi: शहर में बन रहा देश का सबसे बड़ा बर्न इंस्टिट्यूट, मिलेगा आधुनिक इलाज और पहला स्किन बैंक

Varanasi: पूर्वांचल ही नहीं, पूरे देश के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य सौगात के रूप में वाराणसी बर्न इंस्टिट्यूट का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। जंसा क्षेत्र के कुरसातो गांव में बन रहा यह अत्याधुनिक संस्थान देश का सबसे बड़ा बर्न इलाज केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। खास बात यह है कि यहां प्रदेश का पहला और इस पूरे पूर्वी भारत क्षेत्र का भी पहला स्किन बैंक स्थापित किया जाएगा।

भारत में हर साल 60 से 70 लाख लोग जलने की दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। इनमें से करीब 1.5 लाख लोगों की मौत हो जाती है, जबकि 2 लाख से अधिक लोग गंभीर विकृतियों का सामना करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 80% से ज्यादा गंभीर मरीजों को आधुनिक इलाज (Varanasi) नहीं मिल पाता। इसी कमी को दूर करने के उद्देश्य से इस संस्थान की परिकल्पना की गई।

डॉ. सुबोध कुमार सिंह का ड्रीम प्रोजेक्ट

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पीछे वाराणसी के प्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन डॉ. सुबोध कुमार सिंह का वर्षों पुराना सपना है, जो अब साकार होता दिख रहा है। उन्होंने बताया कि 4.5 एकड़ में बन रहे इस संस्थान (Varanasi) में 126 बेड, 26 आईसीयू, 6 ऑपरेशन थिएटर, स्किन बैंक, ब्लड बैंक, प्रशिक्षण और शोध केंद्र जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी।

संस्थान (Varanasi) में 25% गरीब मरीजों का पूरी तरह निःशुल्क इलाज किया जाएगा। वहीं 50% मरीजों को आयुष्मान योजना और अस्पताल की सब्सिडी के तहत मुफ्त इलाज मिलेगा। शेष 25% सक्षम मरीजों के सशुल्क इलाज से प्राप्त राशि गरीबों के उपचार में उपयोग की जाएगी।

Varanasi: स्किन बैंक से जीवन बचाने की नई उम्मीद

इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित होने वाला स्किन बैंक होगा। स्किन बैंक (Varanasi) में किसी मृत व्यक्ति की त्वचा मृत्यु के 6 घंटे के भीतर सुरक्षित कर ली जाती है और विशेष प्रक्रिया के बाद -20°C तापमान पर 5 वर्षों तक संरक्षित रखा जा सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि गंभीर रूप से जले मरीजों में त्वचा सड़ने लगती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में स्किन बैंक (Varanasi) से प्राप्त त्वचा को अस्थायी रूप से लगाकर मरीज की जान बचाई जा सकती है और घाव भरने में मदद मिलती है।

हर प्रकार के बर्न का होगा इलाज

संस्थान (Varanasi) में इलेक्ट्रिक बर्न, केमिकल और एसिड बर्न, स्मोक इनहेलेशन, रेडिएशन और कोल्ड बर्न के लिए अलग-अलग विशेष यूनिट्स बनाई जाएंगी। इसके अलावा ऑक्सीजन चैंबर जैसी उन्नत सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

प्रख्यात सर्जन डॉ. वी. भट्टाचार्य ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह संस्थान भारत में बर्न इलाज के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। वहीं प्रदेश सरकार की ओर से भी सहयोग का आश्वासन दिया गया है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस परियोजना को समर्थन मिला है। कैलिफोर्निया के थॉम्पसन फैमिली फाउंडेशन ने शुरुआती चरण में सहयोग प्रदान कर इस परियोजना (Varanasi) को गति दी।

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