धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी (Varanasi) में शुक्रवार को तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। योगी आदित्यनाथ और डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर इस ऐतिहासिक आयोजन की शुरुआत की। बीएलडब्ल्यू स्थित सूर्य सरोवर मैदान में आयोजित इस महोत्सव ने काशी को मानो प्राचीन भारत के स्वर्णिम युग में पहुंचा दिया। भव्य मंच सज्जा, हाथी-घोड़ों की गूंज और सैकड़ों कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
तीन मंच, 225 कलाकार और ऐतिहासिक भव्यता
इस महानाट्य की सबसे बड़ी खासियत इसका मल्टी-स्टेज प्रेजेंटेशन रहा। तीन विशाल मंचों पर एक साथ अलग-अलग दृश्य प्रस्तुत किए गए, जिनमें सम्राट विक्रमादित्य के जीवन की प्रमुख घटनाओं को जीवंत किया गया।
करीब 225 कलाकारों ने भाग लिया, जिन्होंने जन्म से लेकर राजतिलक, युद्ध कौशल, न्यायप्रियता और प्रजा सेवा तक की गाथाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। मंच पर दौड़ते घोड़े, युद्ध के दृश्य, रथ और हाथियों की मौजूदगी ने पूरे माहौल को वास्तविक बना दिया।
Varanasi: महाकाल की भस्म आरती से शुरुआत
कार्यक्रम (Varanasi) का शुभारंभ उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की भस्म आरती की झलक के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन के बीच पूरा परिसर “भारत माता की जय” और “सम्राट विक्रमादित्य अमर रहें” के नारों से गूंज उठा।
सीएम योगी और मोहन यादव के संबोधन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ने का माध्यम हैं। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य को न्याय, धर्म और लोककल्याण का प्रतीक बताया। वहीं, डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विक्रमादित्य का नाम भारतीय इतिहास में न्याय और पराक्रम का पर्याय है। उन्होंने इस आयोजन को “मनोरंजन के साथ शिक्षाप्रद” बताया।
तकनीक और परंपरा का अनोखा संगम
महानाट्य (Varanasi) में आधुनिक तकनीक का भरपूर उपयोग किया गया।
- हाई-टेक लाइटिंग और डिजिटल साउंड
- एलईडी बैकड्रॉप
- स्मोक और स्पेशल इफेक्ट्स
इन सबने कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बना दिया। दर्शकों को ऐसा अनुभव हुआ जैसे वे किसी “लाइव इतिहास की किताब” को अपनी आंखों के सामने घटित होते देख रहे हों।
कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग (Varanasi) पहुंचे। परिवार, युवा, बच्चे और बुजुर्ग सभी इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बने। कई दर्शकों ने इसे अब तक का सबसे भव्य सांस्कृतिक मंचन बताया। विशेष रूप से बच्चों के लिए यह आयोजन शिक्षाप्रद रहा, जहां उन्होंने इतिहास को किताबों से निकलकर मंच पर जीवंत होते देखा।
यह महोत्सव (Varanasi) केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को जीवित रखने का प्रयास है। सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि न्याय सर्वोपरि है, शासक का कर्तव्य प्रजा की सेवा करना है और ज्ञान और विद्वता का सम्मान जरूरी है। महोत्सव स्थल पर “आर्ष भारत”, “सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या”, “शिव पुराण”, “84 महादेव” और “श्री हनुमान” जैसी प्रदर्शिनियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं।

