Middle East Crisis Impact India: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति का असर अब भारत के व्यापार पर भी पड़ने लगा है। खाड़ी क्षेत्र में जारी अस्थिरता के कारण कच्चे तेल के बाजार में उबाल देखने को मिल रहा है और अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो भारत को हर महीने अरबों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
आर्थिक मामलों से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक व्यापार मार्गों पर पड़ रहा है, जिससे भारत के निर्यात और आयात दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
हर महीने 4 अरब डॉलर तक कम हो सकता है निर्यात
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (FIEO) के महानिदेशक और सीईओ अजय सहाय ने कहा कि यदि पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात एक महीने तक भी जारी रहते हैं तो भारत के निर्यात को गंभीर नुकसान हो सकता है।
उन्होंने बताया कि प्रमुख समुद्री मार्गों में रुकावट आने की स्थिति में भारत के एक्सपोर्ट में हर महीने करीब 4 अरब डॉलर (लगभग 37 हजार करोड़ रुपये) तक की कमी आ सकती है। फिलहाल भारत हर महीने पश्चिम एशिया को करीब 6 अरब डॉलर (लगभग 55,400 करोड़ रुपये) का सामान निर्यात करता है।
कारोबारी तलाश रहे नए समुद्री रास्ते
मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीय निर्यातक वैकल्पिक समुद्री मार्गों की तलाश में जुट गए हैं, ताकि सामान की आपूर्ति प्रभावित न हो। इसके साथ ही कारोबारी नए देशों के साथ व्यापार बढ़ाने के विकल्पों पर भी काम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया भारत के विदेशी व्यापार नेटवर्क का एक अहम केंद्र है। इसी मार्ग से न केवल भारत को तेल और गैस की आपूर्ति होती है, बल्कि भारतीय उत्पाद भी बड़ी मात्रा में इसी रास्ते से विदेशों तक पहुंचते हैं।
180 अरब डॉलर का है भारत-पश्चिम एशिया व्यापार
FIEO के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया के साथ भारत का सालाना व्यापार लगभग 180 अरब डॉलर का है। भारतीय मुद्रा में यह आंकड़ा करीब 16 लाख 62 हजार 260 करोड़ रुपये बैठता है। इसमें भारत का निर्यात करीब 5 से 5.5 लाख करोड़ रुपये का है, जबकि आयात लगभग 11 से 11.5 लाख करोड़ रुपये के बीच है।
यूएई भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
पश्चिम एशिया के देशों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत के कई प्रमुख उत्पाद इसी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में निर्यात किए जाते हैं।
भारत के बासमती चावल के निर्यात का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया के देशों को जाता है। इसके अलावा रत्न और आभूषणों का करीब 30 प्रतिशत निर्यात भी इसी क्षेत्र में होता है, जबकि वाहनों के निर्यात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशियाई बाजारों में भेजा जाता है।
कई प्रमुख सेक्टर इस व्यापार पर निर्भर
भारतीय कंपनियां पश्चिम एशिया को इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, विद्युत मशीनरी, रसायन, कपड़े, दवाएं, प्लास्टिक और पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात करती हैं। इसके अलावा कृषि क्षेत्र भी इस व्यापार से जुड़ा हुआ है। भारत खाड़ी देशों को बड़े पैमाने पर चावल, मांस, मसाले, फल और सब्जियां निर्यात करता है, जो देश के कृषि निर्यात का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहा तो इसका असर केवल तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत के निर्यात, आयात और समग्र आर्थिक गतिविधियों पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
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