धर्म और आस्था की नगरी Kashi एक बार फिर भगवान श्रीजगन्नाथ महाप्रभु के भव्य रथयात्रा महोत्सव की साक्षी बनने जा रही है। असि स्थित प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर में इस वर्ष भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्नान यात्रा, अनवसर लीला, नवयौवन दर्शन, डोली यात्रा और तीन दिवसीय ऐतिहासिक रथयात्रा मेले का आयोजन किया जाएगा। इस पूरे महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
काशी (Kashi) को सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां स्थित असि का श्री जगन्नाथ मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि इसे श्रीक्षेत्र पुरी धाम का प्रतीकात्मक स्वरूप भी माना जाता है। मान्यता है कि यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन करने से पुरी धाम के दर्शन के समान पुण्य प्राप्त होता है।
इतिहास के अनुसार, वर्ष 1790 में भगवान श्रीजगन्नाथ का विग्रह काशी (Kashi) में स्थापित किया गया था। इसके बाद वर्ष 1802 से लगातार यहां ऐतिहासिक रथयात्रा मेले का आयोजन होता आ रहा है, जिसे शापुरी परिवार के वंशज आज भी पूरी श्रद्धा और परंपरा के साथ आयोजित करते हैं।
30 जून से शुरू होगी अनवसर लीला
रथयात्रा महोत्सव की शुरुआत भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के पवित्र स्नान एवं जलाभिषेक से होगी। इसके बाद 30 जून से 14 जुलाई तक भगवान अनवसर काल (Kashi) में रहेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान भगवान अस्वस्थ होकर विश्राम करते हैं और भक्तों को प्रत्यक्ष दर्शन नहीं देते। इसी अवधि में भगवान के स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष आयुर्वेदिक औषधीय काढ़ा तैयार किया जाएगा, जिसे प्रतिदिन प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।
14 जुलाई को होंगे नवयौवन दर्शन
14 जुलाई को अनवसर काल समाप्त होने के बाद भगवान श्रीजगन्नाथ नवयौवन स्वरूप में पहली बार भक्तों को दर्शन देंगे। इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है और भगवान को परवल के जूस का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। 15 जुलाई को भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पारंपरिक डोली यात्रा निकाली जाएगी।
कार्यक्रम का समय
- मंगला आरती – सुबह 5:15 बजे
- डोली सज्जा – दोपहर 3:00 बजे
- डोली यात्रा प्रस्थान – शाम 4:00 बजे
यात्रा असि स्थित (Kashi) श्री जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर दुर्गाकुंड, नवाबगंज, राम मंदिर, कश्मीरीगंज, खोजवां, शंकुलधारा, बैजनत्था और कामाक्षा मंदिर मार्ग से होते हुए पंडित बेनीराम बाग (रथयात्रा क्षेत्र) पहुंचेगी।
16 से 18 जुलाई तक लगेगा ऐतिहासिक रथयात्रा मेला
16 से 18 जुलाई तक चलने वाले तीन दिवसीय रथयात्रा मेले (Kashi) में भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा भव्य रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इन तीनों दिनों सुबह 5 बजे मंगला आरती और दर्शन, दोपहर 12 बजे भोग आरती, दोपहर बाद 3 बजे पुनः दर्शन, रात 8 बजे शयन आरती और मध्यरात्रि 12 बजे विशेष आरती होगी। 18 जुलाई की मध्यरात्रि महाआरती के साथ मेले का समापन होगा।
19 जुलाई को होगी बहुड़ा यात्रा
19 जुलाई को भगवान श्रीजगन्नाथ (Kashi) की बहुड़ा यात्रा निकाली जाएगी, जिसके बाद भगवान पुनः असि स्थित अपने मंदिर में विराजमान होंगे। 20 जुलाई से नियमित पूजा-अर्चना और दर्शन की व्यवस्था पहले की तरह शुरू हो जाएगी।
धार्मिक आयोजन नहीं, सांस्कृतिक विरासत
ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी, असि, वाराणसी के अध्यक्ष वृजेश सिंह ने कहा कि भगवान श्रीजगन्नाथ की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि काशी की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और सनातन परंपरा का जीवंत उत्सव है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं और काशीवासियों से इस महोत्सव में शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने और इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
मंदिर प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं, धर्मप्रेमियों और काशीवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में रथयात्रा महोत्सव (Kashi) में शामिल होकर भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन करें तथा इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दें।

