Varanasi: मुहर्रम की दसवीं तारीख (यौमे आशूरा) पर शुक्रवार को वाराणसी शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक गम और अकीदत का माहौल दिखाई दिया। इमाम चौकों पर सजे ताजियों के बीच ‘या हुसैन… या हुसैन’ की सदाएं गूंजती रहीं। अकीदतमंदों ने शहीद-ए-कर्बला हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को याद करते हुए फातिहा पढ़ी और पूरे सम्मान के साथ ताजिया जुलूस निकाले।
सुबह से ही शहर के विभिन्न इलाकों—कोयला बाजार, छित्तनपुरा, पठानी टोला, पीलीकोठी, अंबिया मंडी, हरतीरथ, राजापुरा, दुल्लीगढ़ही, सलेमपुरा, चौहट्टा, लाल खां, बहेलिया टोला, दीवानगंज और अंसाराबाद सहित कई मुस्लिम बहुल क्षेत्रों (Varanasi) से ताजिया जुलूस रवाना हुए। शहर के प्रमुख इमामबाड़ों—सदर इमामबाड़ा सरैया, दरगाहे फातमान और शिवाला इमामबाड़ा—पर पहुंचकर ताजियों को ठंडा किया गया। वहीं लोहता, पिंडरा, बड़ागांव, सेवापुरी और चिरईगांव समेत ग्रामीण क्षेत्रों में ताजियों को कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
जुलूसों में उमड़ी भीड़, बच्चों में भी दिखा उत्साह
हाथों में इस्लामी झंडे लिए अकीदतमंद ‘या हुसैन’ की सदाओं के साथ आगे बढ़ते रहे। नई सड़क, नदेसर, दालमंडी, गोलगड्डा समेत कई इलाकों (Varanasi) में बड़ी संख्या में लोगों ने ताजियों की जियारत की। बच्चे भी पारंपरिक ताजियों को देखने और जुलूस में शामिल होने को लेकर खासे उत्साहित नजर आए।
दोषीपुरा की प्रसिद्ध ‘मोटे शाबान की ताजिया’ कज्जाकपुरा फ्लाईओवर से होते हुए लाट सरैया इमामबाड़े पहुंची, जहां हजारों अकीदतमंदों की मौजूदगी में उसे ठंडा किया गया।
संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मुहर्रम के मद्देनजर कमिश्नरेट पुलिस पूरी तरह सतर्क रही। जैतपुरा, आदमपुर, लाट सरैया, कज्जाकपुरा, सरैया, मदनपुरा, बजरडीहा और कैंट सहित मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में भारी पुलिस बल, महिला पुलिसकर्मियों और पीएसी की तैनाती की गई। जुलूसों (Varanasi) की निगरानी ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से की गई, जबकि ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया गया। विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस अधिकारियों ने लगातार पैदल गश्त कर कानून-व्यवस्था का जायजा लिया।
Varanasi: नौवीं मुहर्रम से ही शुरू हो गई थीं रस्में
गुरुवार को नौवीं मुहर्रम पर असर की नमाज के बाद शहर के विभिन्न इमाम चौकों पर ताजिए बैठाने की रस्म शुरू हो गई थी। सुन्नी समुदाय के अकीदतमंदों (Varanasi) ने मलीदे और शर्बत की फातिहा के बाद ताजिए स्थापित किए। नदेसर में देर रात पारंपरिक ताजिया प्रतियोगिता का भी आयोजन हुआ, जिसमें आसपास के क्षेत्रों के ताजिएदार शामिल हुए।
शहर की ऐतिहासिक ताजियां बनीं आकर्षण का केंद्र
मुहर्रम के दौरान वाराणसी (Varanasi) की कई ऐतिहासिक ताजियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। लल्लापुरा से निकलने वाली रांगे की ताजिया, करीब 70 किलो रांगे से तैयार की गई है और इसे ‘पंचों का रांगा’ के नाम से जाना जाता है। यह साखू, सागवान और शीशम की लकड़ी पर विशेष कारीगरी के साथ बनाई गई है।
कोयला बाजार की नगीना ताजिया, आजादी से पहले की परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है। शीशम की लकड़ी, शीशों और नगीनों से सजी यह ताजिया सदर इमामबाड़े तक पहुंचती है।
हरिश्चंद्र घाट के पास स्थित कुम्हार के इमामबाड़े की मंदिरनुमा ताजिया, दालमंडी स्थित फारूकी इमामबाड़े की शुद्ध पीतल से बनी ताजिया, औसानगंज की बुर्राक ताजिया, बजरडीहा की शीशे वाली ताजिया, उल्फत बीबी के हाते की जरी की ताजिया और गौरीगंज (Varanasi) की शीशम की ताजिया भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं।
छित्तूपुर से निकला पारंपरिक ताजिया जुलूस
लंका क्षेत्र के छित्तूपुर गेट (Varanasi) से भी वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार ताजिया जुलूस निकाला गया। निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए जुलूस कर्बला पहुंचा, जहां धार्मिक रस्में अदा की गईं। मातमी दस्तों ने नौहा-ख्वानी और सीना-ज़नी कर हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
रास्ते भर विभिन्न स्थानों पर लोगों ने शर्बत और पेयजल की व्यवस्था कर जुलूस का स्वागत किया। पूरे आयोजन के दौरान शहर में शांति, सौहार्द और आपसी भाईचारे (Varanasi) का माहौल देखने को मिला। प्रशासन और पुलिस की सतर्कता के बीच सभी जुलूस शांतिपूर्वक संपन्न हुए।

