देश में वर्ष 1975 में लागू किए गए आपातकाल (Emergency) के लगभग पांच दशक बाद पहली बार NCERT ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में इस विषय को शामिल किया है। ‘Understanding Society: India and Beyond’ नामक पुस्तक में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई एक बड़ी चुनौती के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस बदलाव के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस फैसले का स्वागत किया है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं।
NCERT: इतिहास का काला अध्याय था आपातकाल
भाजपा ने NCERT के इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि 25 जून 1975 भारत के लोकतांत्रिक और संवैधानिक इतिहास का सबसे काला अध्याय था। पार्टी का कहना है कि नई पीढ़ी को उस दौर की जानकारी होना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान तत्कालीन सरकार ने संसद, न्यायपालिका, मीडिया और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाया। साथ ही मीडिया पर सेंसरशिप लागू की गई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हुई। पार्टी ने यह भी कहा कि उस समय कई कलाकारों और राजनीतिक विरोधियों की आवाज दबाई गई थी।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस बदलाव पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि इतिहास को राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरदार वल्लभभाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब भारतीय इतिहास को नए राजनीतिक नजरिए से प्रस्तुत किया जाएगा।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से संवैधानिक संस्थाओं और इतिहास को अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है।
राजद ने भी जताई आपत्ति
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि सत्ता में आने वाली हर सरकार अपने दृष्टिकोण के अनुसार इतिहास और NCERT पाठ्यक्रम में बदलाव करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों को इतिहास का एकपक्षीय स्वरूप पढ़ाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
NCERT की नई पुस्तक में आपातकाल को शामिल किए जाने के बाद शिक्षा और इतिहास लेखन को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। एक पक्ष इसे लोकतंत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय बताते हुए छात्रों को इससे अवगत कराने की जरूरत बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे इतिहास के राजनीतिककरण की दिशा में उठाया गया कदम मान रहा है।

