उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचाते हुए OP Rajbhar के खिलाफ मऊ की अदालत ने गैरजमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। यह कार्रवाई 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए एक विवादित बयान से जुड़ी है, जिसने अब कानूनी रूप ले लिया है।
OP Rajbhar से जुड़ा क्या है मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान मऊ जिले के रतनपुरा बाजार में आयोजित एक जनसभा में राजभर ने कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था।
आरोप है कि OP Rajbhar ने मंच से अभद्र टिप्पणी के साथ-साथ जूता मारने जैसी धमकी भी दी थी, जिसे आचार संहिता और कानून व्यवस्था का उल्लंघन माना गया।
अदालत का सख्त रुख
यह मामला मऊ की MP-MLA कोर्ट में विचाराधीन था, जहां जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की सुनवाई होती है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह की अदालत ने कई बार OP Rajbhar को पेश होने के लिए समन जारी किए थे, लेकिन वह लगातार अनुपस्थित रहे।
बार-बार की गैरहाजिरी को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया और अंततः उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी कर दिया।अदालत के आदेशों की अनदेखी करना इस मामले में निर्णायक साबित हुआ। न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिया कि कानून के सामने कोई भी व्यक्ति—चाहे वह मंत्री ही क्यों न हो—ऊपर नहीं है।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ इसे कानून के सख्त पालन का उदाहरण माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है।

