Varanasi में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की फीस और अन्य खर्चों को लेकर अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन और कुछ दुकानदारों की मिलीभगत से किताबों, कॉपियों और ड्रेस के नाम पर मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है।
इस मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल जिला मुख्यालय (Varanasi) पहुंचा और एडीएम सिटी आलोक कुमार वर्मा को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल हर साल फीस में बढ़ोतरी के साथ-साथ एडमिशन शुल्क, ड्रेस, किताब-कॉपी और अन्य सामग्री के नाम पर अतिरिक्त वसूली कर रहे हैं।
“चिन्हित दुकानों” से खरीदने का दबाव
अभिभावकों का कहना है कि कई स्कूलों द्वारा उन्हें तय दुकानों से ही कॉपी, किताब, ड्रेस, बेल्ट और टाई खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। इन दुकानों पर बाजार की तुलना में अधिक कीमत वसूली जाती है, जिससे खर्च कई गुना बढ़ जाता है।
पार्टी के लोहिया वाहिनी के प्रदेश महासचिव दीपचंद गुप्ता ने कहा कि स्कूल संचालकों और दुकानदारों (Varanasi) के बीच सांठगांठ के चलते “कमीशन का खेल” चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा का क्षेत्र अब सेवा के बजाय व्यापार बनता जा रहा है, जहां अभिभावकों का आर्थिक शोषण हो रहा है।
Varanasi: हर साल बदलता सिलेबस बना समस्या
अभिभावकों ने यह भी शिकायत की कि हर वर्ष अनावश्यक रूप से पाठ्यक्रम (Varanasi) बदल दिया जाता है, जिससे पुरानी किताबें बेकार हो जाती हैं और नई खरीदने की मजबूरी बनती है। इसके अलावा, अगली कक्षा में प्रोन्नत होने के बावजूद पुनः एडमिशन शुल्क वसूले जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
लगातार बढ़ते खर्च के कारण कई अभिभावक बच्चों की पढ़ाई (Varanasi) जारी रखने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हो रहे हैं, जबकि कुछ परिवार आर्थिक तंगी के चलते बच्चों का नामांकन तक नहीं करा पा रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि निजी स्कूलों (Varanasi) की फीस और अन्य वसूली की जांच के लिए एक समिति गठित की जाए। साथ ही सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को इतना मजबूत बनाने पर जोर दिया गया कि हर वर्ग के बच्चे समान स्तर की शिक्षा प्राप्त कर सकें।

