काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में छात्र राजनीति एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। समाजवादी छात्र सभा के इकाई अध्यक्ष हिमांशु यादव के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग के आरोप में दर्ज मुकदमे ने अब तूल पकड़ लिया है। जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद हिमांशु यादव ने पूरे प्रकरण को साजिश करार देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मीडिया से बातचीत में हिमांशु यादव ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी छात्र के साथ न तो मारपीट की और न ही जातिसूचक टिप्पणी की। उनके अनुसार, उन्होंने केवल एक छात्र से उसका नाम और कक्षा पूछी थी। उन्होंने दावा किया कि बातचीत के दौरान उन्होंने खुद अपना परिचय देते हुए अपनी जाति बताई थी, जिसके बाद दूसरे छात्र ने आपत्तिजनक टिप्पणी की।
BHU: दवाब के चलते नहीं हुआ समझौता
हिमांशु ने बताया कि यह घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम (BHU) के सिलसिले में एक प्रोफेसर से हस्ताक्षर कराने गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मामला शुरुआत में आपसी सहमति से सुलझ सकता था, लेकिन कुछ प्रोफेसरों और छात्रों के दबाव के चलते समझौता नहीं हो सका।
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने पहले उन्हें समझौते के लिए बुलाया, लेकिन बाद में अचानक उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया। हिमांशु के मुताबिक, उन्होंने भी चीफ प्रॉक्टर कार्यालय (BHU) में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
छात्र नेता ने कहा कि अगर दूसरा पक्ष अपनी गलती स्वीकार करता है तो वे मामले को आपसी सहमति से खत्म करने को तैयार हैं। हालांकि, ऐसा न होने पर वे एसीपी, डीसीपी, डीआईजी से लेकर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक जाने की बात कह रहे हैं।
इस बीच समाजवादी छात्र सभा ने भी एक बयान जारी कर विश्वविद्यालय (BHU) और पुलिस प्रशासन पर बहुजन छात्रों के खिलाफ पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि जब दलित, पिछड़े, महिला या अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र-छात्राएं शिकायत करते हैं तो प्रशासन निष्क्रिय रहता है, जबकि उनके खिलाफ शिकायत होने पर त्वरित कार्रवाई की जाती है।
संगठन ने अपने बयान में हाल के कुछ अन्य घटनाओं का भी जिक्र किया है, जिनमें 3 फरवरी 2026 को एक छात्र पर कथित हमला, BHU पेट्रोल पंप कर्मचारी के साथ मारपीट और 23 मार्च को शहीद दिवस कार्यक्रम के दौरान छात्रों के साथ अभद्रता जैसे मामले शामिल हैं। इन घटनाओं के हवाले से प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं।

