वाराणसी (Varanasi) की मस्ती और अनोखी परंपराओं का एक और रंग उस वक्त देखने को मिला, जब पहली अप्रैल के मौके पर घोड़ा घाट (डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट) पर 58वां महामूर्ख सम्मेलन आयोजित हुआ। गंगा किनारे देर शाम शुरू हुए इस आयोजन में हजारों स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने हिस्सा लिया और ठहाकों के बीच हास्य-व्यंग्य का भरपूर आनंद उठाया।

कार्यक्रम की शुरुआत आयोजन समिति के अध्यक्ष रहे जगदंबा तुलस्यान को श्रद्धांजलि देकर की गई। इसके बाद मंच पर हास्य और व्यंग्य का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, जिसने पूरे घाट को ठहाकों से गूंजा दिया।
‘बेमेल शादी’ बनी आकर्षण का केंद्र
सम्मेलन (Varanasi) का सबसे खास आकर्षण रहा ‘बेमेल विवाह’। कार्यक्रम अध्यक्ष सुदामा प्रसाद तिवारी (सांड़ बनारसी) की अगुवाई में यह अनोखी शादी कराई गई। दूल्हा नीलम और दुल्हन उमेश ने लालटेन पर हाथ रखकर शपथ ली कि “विवाह जीवन की सबसे बड़ी मूर्खता है”, फिर भी वे इसे सात जन्म तक निभाने को तैयार हैं।

फेरों के दौरान मजेदार शर्तें और व्यंग्यात्मक वचन लिए गए, जिसमें गणितीय और कानूनी तर्ज पर रिश्ते को परिभाषित किया गया। अंत में हास्य के चरम पर पहुंचते हुए दूल्हे ने दुल्हन के ‘अनोखे गुणों’ का जिक्र करते हुए तीन तलाक की घोषणा कर दी, जिस पर पूरा घाट ठहाकों से गूंज उठा।
Varanasi: सम्मलेन में व्यंग्य का तड़का
इस ‘शादी’ में पढ़े गए मंत्र भी किसी आम विवाह (Varanasi) जैसे नहीं थे। पुरोहित ने संस्कृत, हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी और यहां तक कि फिल्मी गीतों को मिलाकर मंत्रोच्चार किया। ‘ओए-ओए तिरछी टोपी वाले’ से दूल्हे का प्रवेश और ‘मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोए’ पर दुल्हन की विदाई ने माहौल को और भी हास्यपूर्ण बना दिया।
सम्मेलन (Varanasi) में देशभर से आए हास्य कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को खूब गुदगुदाया। प्रमुख हास्य कवि दमदार बनारसी ने कहा कि इस आयोजन का मकसद समाज में व्याप्त निराशा को दूर कर लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाना है। दरोगा धर्मराज ने इजरायल युद्ध और पुलिस व्यवस्था पर व्यंग्य कविताएं सुनाईं, वहीं अन्य कवियों ने भी समसामयिक मुद्दों पर तंज कसते हुए खूब तालियां बटोरीं।

