Cough Syrup कांड में जुड़ी सियासी कड़ी: सपा के प्रदेश अध्यक्ष का भतीजा वैभव जायसवाल गिरफ्तार

वाराणसी के चर्चित कफ सिरप तस्करी (Cough Syrup) कांड को लेकर जहां शुरुआत में समाजवादी पार्टी ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला था, वहीं अब जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कहानी का रुख पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है। जिन मुद्दों को लेकर सपा, भाजपा सरकार को घेर रही थी, अब उसी मामले में समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों के नाम सामने आने लगे हैं। इसने न केवल सियासी बयानबाजी को उलझा दिया है, बल्कि सवालों की दिशा भी बदल दी है।

करोड़ों का हुआ लेन-देन

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कोतवाली पुलिस ने बर्तन कारोबारी वैभव जायसवाल को गिरफ्तार किया। वैभव कोई सामान्य व्यक्ति नहीं, बल्कि समाजवादी व्यापार सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप जायसवाल का सगा भतीजा है। इस खुलासे ने मामले (Cough Syrup) को सीधे सियासत के केंद्र में ला खड़ा किया है। आरोप है कि वैभव हवाला कारोबार के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन में शामिल था और कफ सिरप तस्करी के पूरे नेटवर्क की आर्थिक धुरी बना हुआ था।

कफ सिरप कांड को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव लगातार भाजपा नेताओं और पूर्व सांसदों, खासकर जौनपुर के धनन्जय सिंह पर मिलीभगत के आरोप लगाते रहे थे। वहीं सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी संसद में इस नेटवर्क (Cough Syrup) को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। लेकिन अब जब जांच आगे बढ़ी, तो इसी नेटवर्क की एक अहम कड़ी सपा के ही संगठन से जुड़ी निकल आई। इससे राजनीतिक हमलों की धार उलटी पड़ती नजर आ रही है।

जांच में सामने आया है कि वैभव जायसवाल, मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल का सबसे भरोसेमंद सहयोगी था। कफ सिरप तस्करी (Cough Syrup) से जुटाए गए काले धन को वह सोना, शराब और साड़ी कारोबार के जरिए सफेद करता था। इतना ही नहीं, फरार चल रहे शुभम से वह लगातार फेसटाइम के जरिए संपर्क में था और उसी के निर्देश पर हवाला नेटवर्क को संचालित कर रहा था।

Cough Syrup: ऐसे चलता रहा करोड़ों का खेल

वाराणसी के नाटी इमली क्षेत्र में बर्तन की दुकान चलाने वाला वैभव बाहर से एक सामान्य कारोबारी नजर आता था, लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि उसी दुकान की आड़ में करोड़ों रुपये का हवाला कारोबार संचालित किया जा रहा था। पुलिस (Cough Syrup) को उसके ठिकानों से भारी मात्रा में नकदी भी बरामद हुई है, जिसे अवैध लेन-देन का हिस्सा माना जा रहा है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह रोजाना करीब 10 करोड़ रुपये तक का लेनदेन करता था।

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