देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों दिल्ली, प्रयागराज, पटना और कोटा में इन दिनों किताबों से ज्यादा चर्चा रसोई के बढ़ते खर्च और LPG सिलेंडर की हो रही है। घर से दूर रहकर पढ़ाई कर रहे लाखों छात्रों के लिए एलपीजी सिलेंडर के बढ़ते दाम और समय पर उपलब्धता की समस्या अब गंभीर चुनौती बन चुकी है।
मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों से आने वाले छात्रों के लिए किराया, कोचिंग फीस और रोजमर्रा के खर्च के बीच संतुलन बनाना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में रसोई का बजट बिगड़ने से उनकी दैनिक जीवनशैली पर सीधा असर पड़ रहा है।
पिछले कुछ महीनों में LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने छात्रों की कमर तोड़ दी है। सीमित पॉकेट मनी पर निर्भर छात्र अब गैस बचाने के लिए दिन में एक ही बार खाना बनाकर दोनों वक्त खाने को मजबूर हैं। इसका असर उनके पोषण, स्वास्थ्य और पढ़ाई पर पड़ रहा है।
सिलेंडर लेने में भी मुश्किलें
कई छात्र बताते हैं कि गैस रिफिल कराने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुछ इलाकों में घरेलू (LPG) और कमर्शियल गैस की कालाबाजारी के कारण समय पर सिलेंडर नहीं मिल पाता। वहीं, हॉस्टल और पीजी में रहने वाले छात्रों के पास स्थायी पते का प्रमाण न होने से नया कनेक्शन लेना भी आसान नहीं होता।
ऐसी स्थिति में कई छात्र महंगे और छोटे सिलेंडर निजी विक्रेताओं से खरीदने को मजबूर हैं, जो न केवल महंगे होते हैं बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी जोखिम भरे हैं।
विकल्प भी पूरी राहत नहीं दे रहे
महंगे LPG के विकल्प के रूप में छात्र अब इंडक्शन कुकटॉप की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि, बढ़ते बिजली बिल और पीजी मालिकों द्वारा अतिरिक्त शुल्क वसूली के कारण यह विकल्प भी सीमित राहत ही दे पा रहा है।
कुछ जगहों पर छात्रों ने ‘साझा रसोई’ का तरीका अपनाया है, जहां कई छात्र मिलकर एक ही सिलेंडर का उपयोग करते हैं। लेकिन अलग-अलग समय सारिणी के कारण यह व्यवस्था भी लंबे समय तक कारगर नहीं रहती।
शिक्षाविदों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छात्रों के पोषण और स्वास्थ्य पर आर्थिक दबाव जारी रहा, तो इसका सीधा असर उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि छात्र बहुल क्षेत्रों में रियायती दरों पर गैस उपलब्ध कराने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएं।
लेखक- प्रणव कुमार दुबे

