Varanasi: जंसा थाना क्षेत्र की एक दलित महिला ने मंगलवार को पुलिस कमिश्नर का काफिला रोककर न्याय की गुहार लगाई। महिला का आरोप है कि गांव के दबंगों ने उस पर और उसकी 18 वर्षीय बेटी पर जानलेवा हमला किया, लेकिन स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज करने के बजाय कार्रवाई को टाल दिया। पीड़िता ने पुलिस कमिश्नर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
सत्तनपुर गांव निवासी महिला के अनुसार, उनके पति गुजरात में मजदूरी करते हैं और वह अपने बेटे-बेटी के साथ गांव (Varanasi) में रहती हैं। उनका आरोप है कि गांव के कुछ लोगों द्वारा लंबे समय से उन्हें जातिसूचक टिप्पणियां कर प्रताड़ित किया जा रहा है।
पीड़िता के मुताबिक, 23 जून 2026 की सुबह करीब 11:30 बजे आरोपियों ने उनके घर के सामने मड़ई रखकर रास्ता रोक दिया। विरोध करने पर कथित रूप से लाठी-डंडों से हमला कर दिया गया। महिला का आरोप है कि मारपीट (Varanasi) के दौरान उनके साथ अभद्रता की गई, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। वहीं उनकी 18 वर्षीय बेटी भी घायल हुई और बेटे के साथ भी मारपीट की गई।
‘112 पर सूचना देने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई’
पीड़िता का कहना है कि घटना के समय उन्होंने तत्काल 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी थी। मौके पर पुलिस पहुंची, लेकिन आरोप है कि कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। महिला का दावा है कि थाने जाने पर भी एफआईआर दर्ज (Varanasi) नहीं की गई और उन्हें बार-बार इंतजार करने को कहा गया। उनका यह भी आरोप है कि अब तक उनका और उनकी बेटी का सरकारी मेडिकल परीक्षण भी नहीं कराया गया है।
स्थानीय पुलिस (Varanasi) की कार्यशैली से नाराज महिला ने पुलिस कमिश्नर का काफिला रोककर अपनी शिकायत सौंपते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। पीड़िता ने मामले की जांच स्थानीय थाना पुलिस के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों या क्राइम ब्रांच से कराने की अपील की है।
Varanasi: ये हैं पीड़िता की प्रमुख मांगें
पीड़िता ने अधिकारियों को दिए प्रार्थना पत्र में मांग की है कि—
- मां और बेटी का तत्काल सरकारी मेडिकल (Varanasi) परीक्षण और समुचित इलाज कराया जाए।
- आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए।
- मामले की जांच स्थानीय पुलिस के बजाय किसी वरिष्ठ अधिकारी या क्राइम ब्रांच से कराई जाए।
- पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि किसी अप्रिय घटना की आशंका न रहे।
फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है और पूरे प्रकरण की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

