Varanasi: कुलपति का व्हाट्सएप हुआ हैक, परिचितों से मांगे गए 46 हजार रुपये, नाम और फोटो का दुरुपयोग

Varanasi: साइबर अपराधियों ने एक बार फिर अपनी सक्रियता दिखाते हुए प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और Siddharth Singh के व्हाट्सएप अकाउंट को निशाना बनाया है। हैकर ने उनके नाम और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल कर परिचितों एवं शिक्षकों को संदेश भेजकर 46 हजार रुपये की मांग की। मामले की जानकारी होने पर कुलपति ने तत्काल साइबर शिकायत दर्ज कराते हुए क्राइम ब्रांच को लिखित तहरीर सौंपी है।

प्रो. सिद्धार्थ सिंह के नाम और फोटो का दुरुपयोग

जानकारी के अनुसार सोमवार दोपहर करीब 1:22 बजे प्रो. सिद्धार्थ सिंह के व्हाट्सएप नंबर से उनके परिचितों (Varanasi) को एक संदेश भेजा गया, जिसमें पूछा गया कि क्या उनके खाते में 46 हजार रुपये उपलब्ध हैं, क्योंकि किसी को तत्काल धनराशि ट्रांसफर करनी है।

इसके बाद यूपीआई के माध्यम से रकम भेजने की बात कही गई। संदिग्ध संदेश मिलने पर कुछ लोगों ने सीधे प्रो. सिंह से संपर्क किया, तब इस साइबर ठगी का खुलासा हुआ।

Varanasi: डीपी और स्टेटस बदलकर लोगों को किया सतर्क

घटना (Varanasi) की जानकारी मिलते ही प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट की प्रोफाइल फोटो और स्टेटस अपडेट कर लोगों को सतर्क किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके नाम से भेजे जा रहे किसी भी संदेश पर भरोसा न किया जाए और किसी भी अज्ञात खाते में धनराशि न भेजी जाए।

उन्होंने साइबर अपराध पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के साथ क्राइम ब्रांच को लिखित शिकायत भी सौंपी। साथ ही पुलिस को उन संदेशों के स्क्रीनशॉट उपलब्ध कराए गए हैं, जो उनके नाम से विभिन्न लोगों को भेजे गए थे।

सोशल मीडिया पर जारी किया चेतावनी संदेश

प्रो. सिंह ने अपने संदेश में कहा कि कुछ लोग उनके फोटो और पहचान का दुरुपयोग कर व्हाट्सएप तथा अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (Varanasi) पर फर्जी संदेश प्रसारित कर रहे हैं। उन्होंने सभी परिचितों से अपील की कि किसी भी अज्ञात नंबर से भेजे गए फोटोयुक्त या धनराशि मांगने वाले संदेशों को गंभीरता से न लें और न ही कोई आर्थिक लेनदेन करें।

55 वर्षीय प्रो. सिद्धार्थ सिंह प्रसिद्ध साहित्यकार काशीनाथ सिंह के पुत्र हैं। वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय (Varanasi) के पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्तमान में वह नव नालंदा महाविहार के कुलपति के पद पर कार्यरत हैं।

वर्ष 2018 से 2022 तक उन्होंने विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, टोक्यो के निदेशक के रूप में भी सेवाएं दीं और जापान में भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस घटना के बाद शैक्षणिक और सामाजिक जगत के लोगों में साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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