Varanasi: बेनिया बाग की बकरा मंडी पर प्रशासन का ताला, व्यापारियों में मचा हड़कंप, कहा- तीन दिन की मोहलत दे प्रशासन

Varanasi: बकरीद से ठीक पहले शहर की प्रसिद्ध बेनिया बाग बकरा मंडी पर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद व्यापारियों और पशुपालकों में हड़कंप मच गया। प्रशासन द्वारा मंडी स्थल पर ताला लगाए जाने के बाद व्यापारियों ने नाराजगी जताते हुए इसे उनकी रोजी-रोटी पर सीधा प्रहार बताया है।

बताया जा रहा है कि बेनिया बाग पार्क में वर्षों से बकरीद के अवसर पर अस्थायी बकरा मंडी लगती रही है। यहां वाराणसी सहित पूर्वांचल के कई जिलों से पशु व्यापारी बिक्री के लिए बकरे लेकर पहुंचते हैं। प्रतिदिन हजारों की संख्या में खरीदार मंडी में पहुंचते हैं और एक हजार से अधिक बकरों की आमद होती है।

सोमवार को प्रशासनिक टीम (Varanasi) अचानक मंडी पहुंची और स्थल खाली कराने का निर्देश देते हुए मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। कार्रवाई के बाद मंडी परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दूर-दराज से आए व्यापारी अपने बकरों के साथ इधर-उधर भटकते नजर आए।

Varanasi: अचनक टीम ने पहुंचकर बंद कराई मंडी

मंडी के संचालक साजिद ने बताया कि प्रशासन की ओर से पहले किसी प्रकार की कोई सूचना नहीं दी गई थी। उनके अनुसार अधिकारी अचानक पहुंचे और थोड़े समय में मंडी खाली करने का आदेश दे दिया। उन्होंने कहा कि त्योहार में अब केवल तीन दिन शेष हैं और ऐसे समय में मंडी बंद होने से व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

व्यापारियों का कहना है कि इस मंडी से दर्जनों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। कई पशुपालक कर्ज और उधार लेकर बकरे खरीदकर लाए हैं ताकि त्योहार के दौरान बिक्री कर परिवार का खर्च चला सकें। अचानक हुई कार्रवाई से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

तीन दिन की मोहलत दे प्रशासन

मंडी में मौजूद कई व्यापारियों ने प्रशासन से भावुक अपील करते हुए कम से कम तीन दिनों की मोहलत (Varanasi) देने की मांग की। उनका कहना है कि यदि उन्हें कुछ समय मिल जाए तो वे अपने पशुओं की बिक्री कर सकेंगे और नुकसान से बच पाएंगे।

घटना के बाद मंडी संचालक और व्यापारी प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत के लिए पहुंचे। देर शाम तक व्यापारी प्रशासन से राहत मिलने की उम्मीद लगाए रहे। वहीं मंडी में खरीदारी के लिए पहुंचे लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन को मंडी हटानी थी तो पहले से सूचना देकर वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी, ताकि व्यापारियों और खरीदारों दोनों को असुविधा न हो। फिलहाल सभी की निगाहें जिला प्रशासन (Varanasi) के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।

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