Varanasi: आस्था, श्रद्धा और परंपरा का प्रतीक पंचकोशी यात्रा इस बार अव्यवस्थाओं के कारण चर्चा में है। शिवपुर क्षेत्र स्थित पांचों पांडव पड़ाव के आसपास यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी और उमस के बीच हजारों श्रद्धालु पैदल यात्रा कर रहे हैं, लेकिन नगर निगम और प्रशासन की व्यवस्थाएं नाकाफी साबित हो रही हैं।
श्रद्धालुओं का आरोप है कि यात्रा मार्ग पर पर्याप्त शौचालयों की व्यवस्था नहीं की गई है। जहां अस्थायी शौचालय लगाए गए हैं, वहां भी यात्रियों से 10 रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि धार्मिक यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं से इस तरह शुल्क वसूलना गलत है। कई यात्रियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रशासन (Varanasi) मुफ्त सुविधाओं का दावा करता है, लेकिन जमीन पर हालात बिल्कुल अलग हैं।
यात्रा में शामिल बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच पर्याप्त टेंट और विश्राम स्थल नहीं होने से लोग सड़क किनारे बैठने को मजबूर हैं। कई स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था भी अपर्याप्त बताई जा रही है।
Varanasi: पंखे, कूलर या किसी अन्य व्यवस्था का अभाव
श्रद्धालुओं (Varanasi) ने आरोप लगाया कि यात्रा मार्ग पर गर्मी से राहत के लिए पंखे, कूलर या किसी अन्य व्यवस्था का अभाव है। वहीं स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। प्राथमिक उपचार केंद्र, दवाइयां और मेडिकल टीम मौके पर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं। कई यात्रियों की तबीयत गर्मी और थकान के कारण बिगड़ने की शिकायत सामने आई, लेकिन तत्काल चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी।
स्थानीय लोगों ने भी नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली (Varanasi) पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पंचकोशी यात्रा हर वर्ष आयोजित होती है और इसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं, इसके बावजूद व्यवस्थाएं समय पर दुरुस्त नहीं की जातीं। लोगों का आरोप है कि केवल औपचारिक तैयारियां कर जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से बच निकलते हैं।
श्रद्धालुओं और क्षेत्रीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि यात्रा मार्ग पर तत्काल अतिरिक्त शौचालय, मुफ्त पेयजल, विश्राम स्थल, टेंट, पंखे और मेडिकल कैंप की व्यवस्था कराई जाए। साथ ही सफाई व्यवस्था (Varanasi) को भी बेहतर बनाया जाए ताकि श्रद्धालुओं को राहत मिल सके।

