Varanasi में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुधवार को दवा व्यापारियों ने बड़ा प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय रसायनज्ञ एवं औषधि विक्रेता संगठन (AIOCD) के देशव्यापी बंद के आह्वान पर वाराणसी दवा विक्रेता समिति ने भी समर्थन दिया, जिसके चलते शहर की करीब 6000 थोक और रिटेल मेडिकल दुकानें बंद रहीं। हालांकि दवा व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि इमरजेंसी सेवाएं और जरूरी दवाओं की उपलब्धता जारी रहेगी।
सुबह शहर के लंका चौराहा से दवा व्यापारियों (Varanasi) ने अभियान की शुरुआत की। व्यापारियों ने बैनर-पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया और ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने दुकानों को बंद कराने के लिए शहर में भ्रमण भी किया।
“ऑनलाइन कंपनियां नियमों का फायदा उठा रहीं”
दवा विक्रेता समिति के महामंत्री संजय सिंह ने कहा कि यह आंदोलन दवा व्यापारियों के भविष्य और व्यवसाय की सुरक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन दवा कंपनियां नियमों का फायदा उठाकर भारी छूट दे रही हैं, जिससे पारंपरिक मेडिकल स्टोर कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनके अनुसार वर्ष 2018 में आए GSR 17(E) नियम के तहत ऑनलाइन कंपनियों को हर जिले में फार्मेसी स्टोर खोलने की अनुमति दी जानी थी, लेकिन विरोध के चलते इसे लागू नहीं किया जा सका।
Varanasi: कोरोना काल के नियमों पर भी सवाल
व्यापारियों ने कोरोना महामारी के दौरान लागू GSR 220(E) अधिसूचना का भी विरोध किया। उनका कहना है कि होम डिलीवरी की अनुमति मिलने के बाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने बड़े पैमाने पर कारोबार बढ़ाया। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नारकोटिक्स, NRx और अन्य संवेदनशील दवाओं की बिक्री पर्याप्त निगरानी के बिना की जा रही है।
व्यापारियों (Varanasi) का कहना है कि दवाओं की एमआरपी और मार्जिन राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) द्वारा तय किए जाते हैं, इसके बावजूद ऑनलाइन कंपनियां अत्यधिक छूट दे रही हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इस तरह की छूट के पीछे फर्जी दवाओं और अवैध नेटवर्क की संभावना हो सकती है।
देशभर में क्यों हो रहा विरोध?
AIOCD के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.एस. शिंदे के अनुसार बिना मजबूत रेगुलेशन के ऑनलाइन दवा बिक्री तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इससे पारंपरिक केमिस्टों के रोजगार पर खतरा पैदा हो रहा है और बिना डॉक्टर के पर्चे के गंभीर दवाओं (Varanasi) की बिक्री का जोखिम भी बढ़ रहा है।
दवा व्यापारियों की तीन प्रमुख मांगें
दवा व्यापारियों (Varanasi) ने केंद्र सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं—
- GSR 817 अधिसूचना को रद्द किया जाए।
- ई-फार्मेसी के लिए सख्त और नई नियामक व्यवस्था लागू की जाए।
- महामारी के दौरान लागू GSR 220 अधिसूचना को भी समाप्त किया जाए।
व्यापारियों का कहना है कि जब तक सरकार ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर स्पष्ट और कड़े नियम नहीं बनाती, उनका विरोध जारी रहेगा।

