Varanasi: जिले के राजातालाब तहसील सभागार में सोमवार को प्रस्तावित नई अर्बन टाउनशिप/काशी स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के खिलाफ किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया। गंजारी, हरसोस और हरपुर गांव से करीब 250 किसान एकजुट होकर पहुंचे और एसडीएम के समक्ष भूमि अधिग्रहण के विरोध में अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
किसानों ने साफ तौर पर कहा कि वे अब अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। उनका आरोप है कि परियोजना (Varanasi) से जुड़ी सामाजिक समाघात आकलन (SIA) रिपोर्ट अधूरी और त्रुटिपूर्ण है, जिसमें कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है।
किसानों ने बताया कि वे पहले ही स्टेडियम, रिंग रोड, डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज, कन्या विद्यालय और पावर हाउस जैसी परियोजनाओं के लिए अपनी जमीन दे चुके हैं। अब जो जमीन बची है, वही उनके जीवनयापन का एकमात्र साधन है। ऐसे में उसका अधिग्रहण उनके अस्तित्व पर सीधा संकट खड़ा कर देगा।
Varanasi: उपजाऊ जमीन और खेती पर संकट
किसानों के मुताबिक अधिग्रहण (Varanasi) की जा रही जमीन अत्यंत उपजाऊ और बहुफसली है, जहां पूरे साल खेती होती है। यह जमीन छोटे-छोटे हिस्सों में बंटी है और हर परिवार की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। किसानों ने कहा कि व्यावसायिक खेती घर के पास ही संभव होती है, क्योंकि इसमें निरंतर देखरेख और सिंचाई की जरूरत होती है।
आपत्ति दर्ज कराते हुए किसानों ने बताया कि इस परियोजना से करीब 100 मकान प्रभावित होंगे, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने आवास का संकट खड़ा हो सकता है। इसके अलावा कई बाग-बगीचों के नष्ट होने की भी आशंका जताई गई।
रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप
किसानों ने राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि कई जगह बहुफसली जमीन को एक फसली दिखाया गया है। वहीं कई मकान रिकॉर्ड (Varanasi) में दर्ज ही नहीं हैं, जिससे अधिग्रहण के बाद उन्हें अवैध घोषित किया जा सकता है। किसानों का कहना है कि खेतों में वर्तमान में मूली, गाजर, टमाटर जैसी फसलें उगाई जा रही हैं, लेकिन इसका जिक्र रिपोर्ट में नहीं है।
किसानों ने मुआवजे को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि वर्ष 2018 के बाद से सर्किल रेट का पुनर्मूल्यांकन नहीं हुआ है, जिससे वर्तमान बाजार मूल्य का सही आकलन संभव नहीं है। ऐसे में मिलने वाला मुआवजा न्यायसंगत नहीं होगा।
बुनियादी सुविधाओं पर भी असर
किसानों ने यह भी कहा कि परियोजना से क्षेत्र की बिजली, सड़क, पेयजल और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इससे भविष्य में स्थानीय लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
किसानों (Varanasi) ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि परियोजना से स्थानीय लोगों को कोई स्पष्ट लाभ नहीं दिख रहा, जबकि नुकसान साफ नजर आ रहा है।
एसडीएम (Varanasi) ने किसानों की आपत्तियां सुनने के बाद संबंधित विभागों को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन किसानों का रुख साफ है—“जमीन हमारी है, और इसे बचाने के लिए हम हर स्तर पर लड़ाई लड़ेंगे।”

