इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: BHU संविदा कर्मचारियों पर 3 महीने में निर्णय, देरी पर लगा जुर्माना

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में लंबे समय से कार्यरत संविदा गैर-शिक्षण कर्मचारियों के नियमितीकरण के मुद्दे पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने विश्वविद्यालय प्रशासन को तीन महीने के भीतर इस मामले में अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

BHU: समयबद्ध कार्रवाई का आदेश

न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की पीठ ने रिट याचिका संख्या 18901/2024 का निस्तारण करते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर अपना प्रत्यावेदन कुलपति के समक्ष प्रस्तुत करें। इसके बाद कुलपति को तीन महीने के भीतर इस पर निर्णय लेना अनिवार्य होगा।

सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से बार-बार समय मांगे जाने और जवाब दाखिल करने में देरी पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया। इससे पहले की सुनवाई में न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने विश्वविद्यालय (BHU) पर ₹2,000 का हर्जाना लगाया था। यह राशि ‘हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद’ में जमा करने का निर्देश दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता अनूप कुमार सहित 40 कर्मचारियों ने अदालत का रुख करते हुए बताया कि वे वर्ष 2013-14 से BHU में ऑफिस असिस्टेंट और ऑडिट असिस्टेंट जैसे पदों पर लगातार कार्यरत हैं। लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उनका नियमितीकरण नहीं किया गया, जिससे वे अस्थिर रोजगार की स्थिति में हैं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय (BHU) द्वारा जारी विज्ञापन (संख्या 07/2024-2025) के तहत होने वाली नई नियुक्तियां, कुलपति द्वारा लिए जाने वाले निर्णय के अधीन रहेंगी। यानी जब तक इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक नई नियुक्तियों की प्रक्रिया भी प्रभावित रह सकती है।

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