Varanasi: बुद्ध पूर्णिमा पर सारनाथ बना वैश्विक आस्था का केंद्र, 12 देशों के श्रद्धालु पहुंचे, पवित्र अस्थि अवशेष के होंगे दुर्लभ दर्शन

Varanasi: विश्व में बढ़ती अशांति के बीच शांति, करुणा और अहिंसा का संदेश देने के लिए भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ एक बार फिर वैश्विक आस्था का केंद्र बन गया है। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर 12 देशों और भारत के 8 राज्यों से हजारों बौद्ध अनुयायी यहां पहुंच चुके हैं।

कंबोडिया, थाईलैंड, वियतनाम, लाओस, श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश, मलेशिया, कोरिया, तिब्बत और भूटान समेत कई देशों से श्रद्धालु सारनाथ पहुंचे हैं। वहीं महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में अनुयायी पहुंचे हैं।

पवित्र अस्थि अवशेष के दुर्लभ दर्शन

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं (Varanasi) को भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष के दर्शन का दुर्लभ अवसर मिलेगा। ये अवशेष साल में केवल दो बार ही आम लोगों के लिए दर्शनार्थ रखे जाते हैं। शुक्रवार सुबह 6 बजे से 11 बजे तक मूलगंध कुटी विहार परिसर में दर्शन-पूजन का क्रम चलेगा।

बुद्ध पूर्णिमा के दिन सारनाथ में दिनभर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भिक्षु चंदिमा महाथेरो के अनुसार:

  • सुबह 6 से 11 बजे: पवित्र अवशेष के दर्शन
  • दोपहर 12 से 3 बजे: धम्म सभा व सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • शाम 4 बजे: डॉ. आंबेडकर स्मारक स्थल से सारनाथ तक धम्म यात्रा
  • शाम 6 बजे: धम्मदेशना (उपदेश)

इसके अलावा चिकित्सा शिविर और महाबोधि सोसाइटी परिसर (Varanasi) में सुबह से रात तक सामूहिक भोजन दान कार्यक्रम भी आयोजित होगा।

Varanasi: सजावट से दमका पूरा सारनाथ

बुद्ध पूर्णिमा को लेकर मूलगंध कुटी विहार सहित विभिन्न बौद्ध मंदिरों को भव्य सजावट से सजाया गया है। पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का वातावरण महसूस किया जा रहा है।

केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के शांत रक्षित पुस्तकालय में “हिमालय: द सेक्रेड साइलेंस ऑफ स्पिरिचुअलिटी एंड पीस” विषय पर चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। प्रसिद्ध कलाकार हरि दर्शन सांख्य की 108 कलाकृतियां यहां प्रदर्शित होंगी, जिनमें हिमालय की आध्यात्मिक विरासत को दर्शाया गया है।

क्यों खास है बुद्ध पूर्णिमा?

वैशाख पूर्णिमा का दिन भगवान गौतम बुद्ध के जीवन की तीन महत्वपूर्ण घटनाओं—जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण से जुड़ा है। यही कारण है कि यह दिन बौद्ध अनुयायियों (Varanasi) के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है।

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