Varanasi के संकुलधारा पोखरा में बीते कुछ दिनों से लगातार हो रही मछलियों की मौत के मामले में अब स्थिति साफ हो गई है। जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि मछलियों की मौत का मुख्य कारण बैक्टीरियल संक्रमण है, जबकि पानी की गुणवत्ता और घुलित ऑक्सीजन (DO) का स्तर सामान्य पाया गया है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग ने विशेषज्ञों की टीम को मौके पर भेजा। टीम ने पोखरे के पानी का नमूना लेकर जांच के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग में परीक्षण कराया। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि मछलियों की मौत प्रदूषण या ऑक्सीजन की कमी से नहीं, बल्कि जैविक संक्रमण के कारण हो रही है।
सिर्फ थाई बांगुर मछलियां ही प्रभावित
पोखरे (Varanasi) की देखरेख कर रहे विशेषज्ञ परम के अनुसार, मरने वाली मछलियां केवल थाई बांगुर (Pangasius) प्रजाति की हैं, जबकि अन्य स्थानीय मछलियां पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि इस विशेष प्रकार का बैक्टीरिया मुख्य रूप से इसी प्रजाति को प्रभावित करता है, जिससे उनमें संक्रमण तेजी से फैलता है और उनकी मृत्यु हो जाती है।
पानी की गुणवत्ता और ऑक्सीजन स्तर सामान्य
विशेषज्ञों ने मौके पर पहुंचकर पानी की गुणवत्ता और घुलित ऑक्सीजन स्तर की जांच की, जो सामान्य पाई गई। इससे यह स्पष्ट हो गया कि मछलियों की मौत जल प्रदूषण या ऑक्सीजन की कमी से नहीं, बल्कि बैक्टीरियल संक्रमण से हो रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, थाई बांगुर एक विदेशी प्रजाति की मछली है, जो स्थानीय पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होती है। यदि किसी जलाशय (Varanasi) में इनकी संख्या निर्धारित क्षमता से अधिक हो जाती है, तो कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं—
- अधिक घनत्व के कारण मछलियों में तनाव बढ़ता है, जिससे रोगों का खतरा बढ़ जाता है
- पानी में बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं और संक्रमण का प्रसार होता है
- विदेशी प्रजाति होने के कारण यह स्थानीय परिस्थितियों (Varanasi) में जल्दी प्रभावित होती है
- कूड़ा-कचरा, दूध और अन्य जैविक अपशिष्ट पानी में जाने से बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है
विशेषज्ञों की अपील
- पोखरे में अनावश्यक रूप से मछलियां न छोड़ी जाएं
- कूड़ा-कचरा और दूध जैसे पदार्थ जलाशय में न डालें
- प्राकृतिक जल स्रोतों के संतुलन को बनाए रखने में सहयोग करें
प्रशासन ने भी मामले पर नजर बनाए रखी है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।

