Central Government: मोदी सरकार के 12 साल पर कांग्रेस का हमला, महानगर अध्यक्ष ने कहा- प्रचार ज्यादा, जवाबदेही कम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर केंद्र (Central government) की नीतियों और कार्यशैली पर बुधवार को कांग्रेस ने तीखा हमला बोला। वाराणसी महानगर कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी बयान में महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि पिछले 12 वर्षों का कार्यकाल उपलब्धियों से अधिक प्रचार, इवेंट प्रबंधन और जनभावनाओं के दोहन का दौर साबित हुआ है।

राघवेन्द्र चौबे ने कहा कि “प्रचार की चमक में जनता की पीड़ा छुपाई नहीं जा सकती।” उन्होंने आरोप लगाया कि जिस सरकार (Central government) ने “अच्छे दिन” का सपना दिखाया था, उसी दौर में आम नागरिक महंगाई, बेरोजगारी और असुरक्षा के बोझ तले दब गया। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि देश वास्तव में प्रगति कर रहा है तो रसोई गैस, पेट्रोल, डीजल और खाद्य पदार्थों की लगातार बढ़ती कीमतों से जनता परेशान क्यों है।

व्यवस्थाओं के सवाल में उझ्कर रह गया सरकार

युवाओं के मुद्दे पर कांग्रेस ने कहा कि करोड़ों रोजगार देने का दावा करने वाली सरकार (Central government) के कार्यकाल में युवा भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और संविदा व्यवस्था की समस्याओं में उलझकर रह गया। चौबे ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “सरकार रोजगार कम और विज्ञापन अधिक पैदा कर रही है।”

महिला सुरक्षा के मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं ने कहा कि “बेटी बचाओ” का नारा ज़मीनी स्तर पर सुरक्षा में परिवर्तित नहीं हो सका। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए गए।

Central government: सरकार के रहे सिर्फ बे-बड़े भाषण

राष्ट्रीय सुरक्षा पर टिप्पणी करते हुए राघवेन्द्र चौबे ने कहा कि बड़े-बड़े भाषणों के बावजूद सीमाओं पर तनाव और आंतरिक अस्थिरता ने सरकार (Central government) की रणनीतिक तैयारी की पोल खोल दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन के मुद्दे पर सरकार की भाषा उतनी कठोर नहीं दिखी, जितनी चुनावी मंचों पर दिखाई देती है।

विदेश नीति को लेकर कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि कैमरों की फ्लैश में कूटनीति सफल दिखाई जा सकती है, लेकिन पड़ोसी देशों से बिगड़ते संबंध वास्तविक स्थिति को उजागर करते हैं। कांग्रेस ने वर्ष 2016 की नोटबंदी को देश की अर्थव्यवस्था पर “आत्मघाती प्रहार” करार देते हुए कहा कि इससे काला धन समाप्त नहीं हुआ, बल्कि छोटे व्यापारी, मजदूर और मध्यम वर्ग आर्थिक रूप से प्रभावित हुआ।

किसानों को झेलना पड़ा अपमान और अविश्वास

किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए महानगर अध्यक्ष ने कहा कि जिस अन्नदाता ने संकट के समय देश को संभाला, उसी किसान को सड़कों पर अपमान और अविश्वास झेलना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार (Central government) ने संवाद की बजाय अहंकार को प्राथमिकता दी।

जांच एजेंसियों के मुद्दे पर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का उपयोग निष्पक्षता के बजाय राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। पार्टी ने कहा कि “जो सत्ता के साथ है वह पवित्र और जो सवाल पूछे वही संदिग्ध घोषित कर दिया जाता है।”

सामाजिक माहौल को लेकर कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बेरोजगारी और महंगाई जैसे मूल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए विभाजनकारी विमर्श को बढ़ावा दिया गया। पार्टी का आरोप है कि जनता की वास्तविक समस्याओं पर चर्चा के बजाय भावनात्मक ध्रुवीकरण को राजनीतिक हथियार बनाया गया।

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