Varanasi के ऐतिहासिक और घनी आबादी वाले दालमंडी इलाके में चौड़ीकरण और सौंदरीकरण परियोजना अब नए चरण में पहुंच गई है। मकानों और दुकानों पर कार्रवाई के बाद अब प्रशासन की नजर उन छह मस्जिदों पर है, जो प्रस्तावित काशी विश्वनाथ धाम मार्ग परियोजना की जद में आ रही हैं। प्रशासन इसे शहर के विकास और यातायात सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, जबकि स्थानीय स्तर पर इसको लेकर चर्चाएं और चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
दालमंडी से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक चौड़ा और व्यवस्थित मार्ग तैयार करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। परियोजना के तहत 180 से अधिक मकान और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान चिह्नित किए गए हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार अब तक 105 से अधिक मकानों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा चुकी है।
पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम लगातार इलाके में सर्वे और ध्वस्तीकरण अभियान चला रही है। अधिकारियों का दावा है कि इस परियोजना (Varanasi) से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी तथा क्षेत्र में जाम और अव्यवस्था की समस्या कम होगी।
छह मस्जिदें भी आईं परियोजना की जद में
अब जिन धार्मिक स्थलों को लेकर प्रशासन सक्रिय हुआ है, उनमें लंगड़ा हाफिज मस्जिद, करीमुल्ला बेग मस्जिद, संगमरमर वाली मस्जिद, निसारन मस्जिद, अली रजा मस्जिद और रंगीले शाह मस्जिद शामिल हैं। प्रशासन ने मस्जिदों (Varanasi) के मुतवल्लियों और संबंधित कमेटियों के साथ बातचीत शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक, इन धार्मिक स्थलों के विस्थापन और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कई दौर की चर्चा चल रही है। प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया आपसी सहमति और संवेदनशीलता के साथ पूरी करने की कोशिश की जा रही है।
विरोध और संवेदनशीलता के बीच कार्रवाई
इससे पहले मकानों और दुकानों पर बुलडोजर कार्रवाई के दौरान स्थानीय व्यापारियों और निवासियों ने विरोध दर्ज कराया था। कई परिवारों (Varanasi) ने अपने पुश्तैनी मकान और कारोबार टूटने पर नाराजगी जताई थी। अब मामला धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के कारण प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
इलाके में पुलिस और प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी प्रकार की तनावपूर्ण स्थिति न बनने पाए। अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों को विश्वास में लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
31 मई तक प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इन छह मस्जिदों को 31 मई तक खाली कराने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं पूरे दालमंडी चौड़ीकरण (Varanasi) और सौंदरीकरण प्रोजेक्ट को 31 अगस्त तक पूरा कर हैंडओवर करने की तैयारी चल रही है।
दालमंडी (Varanasi) सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि बनारस की साझा सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा मानी जाती है। यहां की संकरी गलियां, पुरानी इमारतें और धार्मिक स्थल शहर की ऐतिहासिक पहचान रहे हैं। ऐसे में यह परियोजना जहां आधुनिक और व्यवस्थित बनारस की तस्वीर पेश कर रही है, वहीं यह सवाल भी उठ रहा है कि विकास की इस रफ्तार में शहर अपनी पुरानी विरासत और आत्मा को कितना सुरक्षित रख पाएगा।

