Varanasi: काशी विश्वनाथ धाम में हाल ही में लागू की गई ऐप आधारित नई दर्शन व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद शुरू हुई इस व्यवस्था ने अब धार्मिक आस्था, प्रशासनिक फैसलों और राजनीति के बीच टकराव को खुलकर सामने ला दिया है। मंदिर परिसर के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती इस बात का संकेत दे रही है कि मामला अब केवल प्रबंधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।
आस्था बनाम तकनीक को लेकर कांग्रेस का हमला
नई व्यवस्था के तहत दर्शन के लिए ऐप आधारित प्रणाली लागू की जा रही है, जिसे प्रशासन आधुनिक सुविधा के रूप में पेश कर रहा है। लेकिन आम श्रद्धालुओं का एक बड़ा वर्ग इसे आस्था पर नियंत्रण की कोशिश मान रहा है।
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने इस फैसले को “आस्था पर सीधा प्रहार” बताते हुए आरोप लगाया कि बाबा विश्वनाथ के दरबार को “कॉरपोरेट मॉडल” में बदला जा रहा है। उनका कहना है कि सदियों पुरानी सरल और सहज दर्शन व्यवस्था (Varanasi) को तकनीकी जाल में फंसाया जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि काशी की पहचान उसकी परंपराओं, श्रद्धा और सरलता से रही है—न कि मोबाइल ऐप, पासवर्ड और डिजिटल बाधाओं से।
पार्टी ने आरोप लगाया कि मंदिर प्रशासन काशी (Varanasi) की सांस्कृतिक आत्मा को समझे बिना इसे एक प्रयोगशाला की तरह चला रहा है। उनका यह भी कहना है कि इस व्यवस्था से गरीब, ग्रामीण, बुजुर्ग और तकनीक से दूर लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
Varanasi: सपा ने भी खोला मोर्चा
समाजवादी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन को घेरते हुए इसे “धर्म और आस्था से खिलवाड़” बताया। पार्टी का कहना है कि श्रद्धालुओं को नियमों और तकनीकी बाधाओं में बांधना गलत है और इससे उनकी धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।
नई व्यवस्था के चलते कई श्रद्धालुओं को लंबी कतारों और तकनीकी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा है। खासकर वे लोग जिनके पास स्मार्टफोन या डिजिटल जानकारी नहीं है, उन्हें अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों (Varanasi) का कहना है कि पहले जहां सहज दर्शन संभव था, अब वहां जटिल प्रक्रियाओं ने स्थिति को कठिन बना दिया है।
कांग्रेस ने मांग की है कि विवादित व्यवस्था को तुरंत वापस लिया जाए, स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए सरल प्रवेश सुनिश्चित किया जाए और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और इसके साथ ही पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि व्यवस्था (Varanasi) में बदलाव नहीं हुआ तो काशीवासी और संत समाज सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

